एक अति-वामपंथी कार्यकर्ता समूह, वुलकानग्रुप (Vulkangruppe) ने शनिवार की सुबह बर्लिन में एक संदिग्ध आगजनी हमले की जिम्मेदारी ली, जिसके कारण भारी बिजली गुल हो गई। इस हमले से 45,000 घरों और 2,200 व्यवसायों में बिजली नहीं रही, जिससे अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा। समूह ने कहा कि उनका लक्ष्य जीवाश्म ईंधन अर्थव्यवस्था था, बिजली बाधित करना नहीं।
यह घटना दक्षिण-पश्चिम बर्लिन में एक बिजली संयंत्र के पास हुई, जहाँ एक पुल पर केबल जलती हुई पाई गईं। दमकल कर्मियों ने तुरंत आग बुझा दी। हालांकि, नुकसान के कारण व्यापक व्यवधान हुआ।
बिजली गुल होने से अस्पतालों और देखभाल सुविधाओं को आपातकालीन जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा। उम्मीद है कि सप्ताह की शुरुआत में स्कूल बंद रहेंगे। गुरुवार तक पूरी तरह से बिजली बहाल होने की उम्मीद नहीं है, जिससे संभावित रूप से उत्पादकता और वाणिज्य प्रभावित हो सकता है। बर्लिन के मेयर ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई, खासकर अस्पतालों में। राज्य के अर्थव्यवस्था मंत्री ने पुष्टि की कि आग लगाने वाले उपकरणों से नुकसान हुआ है।
यह हमला जर्मनी की ऊर्जा नीति और कुछ कार्यकर्ता समूहों द्वारा अपनाई गई रणनीति के आसपास जारी तनाव को उजागर करता है। व्यवसायों पर बिजली गुल होने के वित्तीय प्रभाव का आकलन किया जाना बाकी है।
पुलिस घटना की जांच कर रही है। अधिकारी बिजली बहाल करने और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।
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