कब्जे वाले यूक्रेन के स्कूलों में बच्चों को रूसी राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित करने की खबरें हैं। रूसी सैनिक छात्रों को जबरदस्ती इन स्कूलों में वापस भेज रहे हैं। यह जानकारी छात्रों और विशेषज्ञों के साथ किए गए साक्षात्कारों पर आधारित न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार है।
15 वर्षीय क्षेनिया से जुड़ी घटना अक्टूबर के अंत में हुई। सैनिक उसके घर पर छापा मारकर उसके सौतेले पिता को गिरफ्तार कर लिया और उसे रूसी भाषा के स्कूल में जाने के लिए मजबूर किया। पाठ्यक्रम में रूसी राष्ट्रगान, रूस समर्थक वृत्तचित्र और देशभक्ति कक्षाएं शामिल हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ और अधिकार समूह खतरे की घंटी बजा रहे हैं। उनका कहना है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में मॉस्को की शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य यूक्रेनी पहचान को मिटाना है। यह कार्यक्रम लगभग चार वर्षों से चल रहा है।
रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन किया है। अंतर्राष्ट्रीय कानून इन क्षेत्रों को कब्जे वाले क्षेत्र मानता है। एक विदेशी पाठ्यक्रम का लागूकरण संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करता है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा इन कार्यों की निंदा किए जाने की संभावना है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा आगे की जांच की उम्मीद है। यूक्रेनी बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव चिंता का विषय बना हुआ है।
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