क्रिसमस दिवस 2025 पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में हवाई हमले किए जाने के दो सप्ताह बाद, सटीक लक्ष्यों और ऑपरेशन के समग्र परिणामों के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है। सोकोतो राज्य में किए गए हमलों को अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को निशाना बनाने के रूप में वर्णित किया था।
मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, नाइजीरियाई सरकार के साथ समन्वयित ऑपरेशन, लकुरावा नामक एक इस्लामी समूह पर केंद्रित था। यह समूह मुख्य रूप से मुस्लिम स्थानीय आबादी से जबरन वसूली करने और शरिया कानून की कठोर व्याख्या लागू करने के लिए जाना जाता है, जिसमें संगीत सुनने जैसी गतिविधियों के लिए कोड़े मारने जैसी सजाएं शामिल हैं।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हमलों के बाद अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि "उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में ISIS आतंकवादी गुंडों, जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे थे और बेरहमी से मार रहे थे, पर कई सटीक हमले किए गए।"
हालांकि, अमेरिकी और नाइजीरियाई दोनों सरकारों ने हमलों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल की गई विशिष्ट खुफिया जानकारी, लक्ष्यीकरण प्रक्रिया में नाइजीरियाई भागीदारी की सीमा और नागरिक हताहतों के आकलन के बारे में सीमित जानकारी जारी की है। पारदर्शिता की इस कमी ने अटकलों को हवा दी है और ऑपरेशन की वास्तविक प्रकृति और जमीन पर इसके प्रभाव के बारे में सवाल उठाए हैं।
खुफिया जानकारी जुटाने और लक्ष्य की पहचान करने में AI का उपयोग आधुनिक सैन्य अभियानों में तेजी से प्रचलित है। AI एल्गोरिदम संभावित लक्ष्यों की पहचान करने और दुश्मन के व्यवहार की भविष्यवाणी करने के लिए उपग्रह इमेजरी, सोशल मीडिया पोस्ट और संचार इंटरसेप्ट सहित डेटा की विशाल मात्रा का विश्लेषण कर सकते हैं। हालांकि, AI पर निर्भरता एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह और त्रुटियों की संभावना के बारे में नैतिक चिंताएं भी पैदा करती है, जिससे नागरिक हताहत हो सकते हैं।
इंस्टीट्यूट फॉर द फ्यूचर में AI नैतिकता की विशेषज्ञ डॉ. अन्या शर्मा बताती हैं, "AI सिस्टम केवल उतने ही अच्छे हैं जितना कि उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया गया डेटा। यदि डेटा मौजूदा पूर्वाग्रहों को दर्शाता है, तो AI उन पूर्वाग्रहों को बढ़ाएगा, जिससे संभावित रूप से भेदभावपूर्ण परिणाम सामने आएंगे।"
उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में स्थिति जटिल है, इस क्षेत्र में कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जिनमें डाकू, आपराधिक गिरोह और इस्लामी आतंकवादी शामिल हैं। अमेरिकी हवाई हमलों के बारे में स्पष्टता की कमी के कारण सुरक्षा स्थिति और स्थानीय आबादी पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करना मुश्किल हो गया है।
मानवाधिकार संगठनों ने हवाई हमलों के बारे में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले सप्ताह जारी एक बयान में अमेरिकी और नाइजीरियाई दोनों सरकारों से ऑपरेशन की पूरी और निष्पक्ष जांच करने और गैरकानूनी हमलों के किसी भी पीड़ित को मुआवजा प्रदान करने का आग्रह किया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल नाइजीरिया के निदेशक ओसाई ओजिघो ने कहा, "यह आवश्यक है कि सैन्य अभियानों में शामिल सभी पक्ष नागरिक नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।"
अभी तक, अमेरिका या नाइजीरिया दोनों में से किसी ने भी हवाई हमलों की औपचारिक जांच की कोई योजना घोषित नहीं की है। जानकारी की कमी अटकलों को हवा देना जारी रखती है और क्षेत्र की स्थिरता के लिए ऑपरेशन के दीर्घकालिक परिणामों के बारे में चिंताएं बढ़ाती है। यह घटना सैन्य अभियानों में AI के उपयोग के लिए स्पष्ट नैतिक दिशानिर्देशों और निरीक्षण तंत्र की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करती है, खासकर जटिल और अस्थिर वातावरण में।
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