आज ACLU ने ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया, जिसमें मिनेसोटा में सोमाली और लातीनी समुदायों के खिलाफ "नस्लीय प्रोफाइलिंग अभियान" का आरोप लगाया गया है। तीन अमेरिकी नागरिकों की ओर से दायर मुकदमे में दावा किया गया है कि संघीय कानून प्रवर्तन ने नस्ल के आधार पर व्यक्तियों को लक्षित किया। इन व्यक्तियों को कथित तौर पर बिना वारंट या संभावित कारण के गिरफ्तार किया गया या रोका गया।
ACLU का कहना है कि प्रशासन के बयानों ने अंधाधुंध गिरफ्तारियों को बढ़ावा दिया। उनका तर्क है कि एजेंटों ने व्यक्तियों को सोमाली या लातीनी समझा। ACLU की वकील केट हडलस्टन ने इन कार्यों को "पुलिस-राज्य की रणनीति" बताते हुए निंदा की। उन्होंने स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों के उल्लंघन पर जोर दिया।
मुकदमा तत्काल मिनेसोटा में संघीय आव्रजन प्रवर्तन प्रथाओं को चुनौती देता है। यह संभावित नागरिक अधिकार उल्लंघनों के बारे में चिंताएं बढ़ाता है। सरकार ने अभी तक आरोपों का जवाब नहीं दिया है।
यह कानूनी कार्रवाई ट्रम्प प्रशासन के तहत बढ़े हुए आव्रजन प्रवर्तन के बाद हुई है। आलोचकों ने लंबे समय से प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण प्रथाओं का आरोप लगाया है। प्रशासन ने लगातार इन दावों का खंडन किया है।
अदालत अब ACLU के दावों की समीक्षा करेगी। एक न्यायाधीश यह तय करेगा कि निषेधाज्ञा दी जाए या नहीं। इससे कथित नस्लीय प्रोफाइलिंग अभियान को संभावित रूप से रोका जा सकता है। इस मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित होने की उम्मीद है।
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