अम्मान, जॉर्डन में एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी परिवार में जन्मे उमर यागी ने 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीता। यह पुरस्कार धातु-कार्बनिक ढाँचों (MOFs) के उनके अभूतपूर्व विकास को मान्यता देता है। ये सामग्री कार्बन को पकड़ सकती हैं और हाइड्रोजन का भंडारण कर सकती हैं।
यागी का प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। उन्हें सप्ताह में केवल एक बार ताज़ा पानी मिलता था। इस अनुभव ने उनकी वैज्ञानिक कल्पना को बढ़ावा दिया। उन्होंने अंततः ऐसी प्रणालियाँ ईजाद कीं जो रेगिस्तानी हवा से पानी खींचती हैं। नोबेल समिति ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए MOFs की क्षमता को पहचाना।
वैज्ञानिक समुदाय ने यागी की उपलब्धि की सराहना की। कई लोगों का मानना है कि MOFs कार्बन कैप्चर और स्वच्छ ऊर्जा भंडारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका काम गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का एक संभावित समाधान प्रदान करता है।
यागी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में प्रोफेसर और एटोको के संस्थापक हैं। शरणार्थी से नोबेल पुरस्कार विजेता तक का उनका सफर दृढ़ता और वैज्ञानिक नवाचार की एक प्रेरणादायक कहानी है।
यागी को इस साल के अंत में स्टॉकहोम में औपचारिक रूप से नोबेल पुरस्कार मिलेगा। MOFs के अनुसंधान और विकास में विश्व स्तर पर तेजी आने की उम्मीद है। इससे पर्यावरण प्रौद्योगिकी में व्यापक अनुप्रयोग हो सकते हैं।
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