इंग्लैंड और वेल्स में जल कंपनियों को अधिक कठोर निरीक्षण का सामना करना पड़ेगा, जिसमें बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण और नियमित एमओटी-शैली की जाँच शामिल है, क्योंकि सरकार ने जल उद्योग में व्यापक बदलाव करने का फैसला किया है। पर्यावरण सचिव एम्मा रेनॉल्ड्स ने इन बदलावों की घोषणा करते हुए इन्हें निजीकरण के बाद के सबसे महत्वपूर्ण सुधार बताया है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण की घटनाओं, रिसाव और पानी की कटौती से व्यापक सार्वजनिक असंतोष को दूर करना है।
सरकार का जल श्वेत पत्र कंपनी-विशिष्ट टीमों के निर्माण का प्रस्ताव करता है, जिन्हें व्यक्तिगत फर्मों की निगरानी और समर्थन करने का काम सौंपा जाएगा, जो "डेस्क आधारित, सभी के लिए एक समान" दृष्टिकोण से हटकर होगा। रेनॉल्ड्स ने बीबीसी को बताया कि वर्तमान प्रणाली जल कंपनियों को "अपना होमवर्क खुद जाँचने" की अनुमति देती है, जिससे नियामकों और कंपनियों को शामिल करते हुए "पूरी प्रणाली विफल" हो गई है। उपकरणों पर अनिवार्य जल दक्षता लेबल भी प्रस्तावित उपायों का हिस्सा हैं।
यह बदलाव हाल के वर्षों में जल कंपनियों के प्रदर्शन पर बढ़ते सार्वजनिक आक्रोश के बाद किया गया है। प्रदूषण की घटनाओं और पानी की कटौती से हजारों ग्राहक प्रभावित हुए हैं, जिससे अधिक जवाबदेही और सख्त विनियमन की मांग की जा रही है। नए उपायों का उद्देश्य अधिक सक्रिय और उत्तरदायी नियामक ढांचा प्रदान करना है।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से यह सुनिश्चित होगा कि जल कंपनियों को उच्च मानकों पर रखा जाए और वे अपने ग्राहकों और पर्यावरण की जरूरतों के प्रति अधिक उत्तरदायी हों। प्रस्तावित सुधारों की वर्तमान में समीक्षा की जा रही है और आने वाले महीनों में इन्हें लागू किए जाने की उम्मीद है।
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